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देव दीपावली

त्रिपुरोत्सव दीपदान – भारतीय मानक समय (UTC+5:30)

Puri में देव दीपावली मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को है; त्रिपुरोत्सव दीपदान 5:07 PM से 6:23 PM तक (भारतीय मानक समय, UTC+5:30)।

मंगल, 24 नव॰, Puri के मुहूर्त

करें1 मुहूर्त
1 –
त्रिपुरोत्सव दीपदान, फिर आरती
शास्त्र

आरती, मंत्र और कथा

प्रत्येक चित्र Vandan में वही पृष्ठ खोलता है

मंगलवार, 24 नवंबर 2026भारतीय मानक समय (UTC+5:30)
कार्तिक (अमान्त) · शुक्ल पक्ष
15
पूर्णिमा8:23 PM तक, फिर प्रतिपदा
नक्षत्रकृत्तिका11:25 PM तक, फिर रोहिणी
योगपरिघ4:06 PM तक, फिर शिव
करणविष्टि10:05 AM तक, फिर बव
सूर्योदय
सूर्यास्त
चंद्रोदय
चंद्रास्त

मुहूर्त

शुभ

ब्रह्म मुहूर्त – अभिजीत मुहूर्त – विजय मुहूर्त – अपराह्न काल – प्रदोष काल – निशीथ काल –

अशुभ

राहु काल – यमगंड – गुलिक काल –
आज के देवताशास्त्र
वारमंगलपूरे दिनऔर: कुमार
परंपरा सेहनुमानपूरे दिन
तिथिचन्द्र6:00 AM – 8:23 PM8:23 PM से: अग्निऔर: विश्वेदेव
नक्षत्रअग्नि6:00 AM – 11:25 PM11:25 PM से: प्रजापति
आज के नियमशास्त्र

न खाएँ

तिल का तेल – लाल शाक – कूष्माण्ड –

प्रशस्त

सरसों का तेल –

निषेध उतनी देर रहता है जितनी देर उसकी तिथि चलती है।

चौघड़ियापरंपरा (गुजरात–राजस्थान)

दिन

रोग – उद्वेग · वार वेला – चर – लाभ – अमृत – काल · काल वेला (चौघड़िया) – शुभ – रोग –

रात

काल – लाभ · कालरात्रि – उद्वेग – शुभ – अमृत – चर – रोग – काल –
लग्नशास्त्र · ज्योतिष

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वृश्चिक · स्थिर – धनु · द्विस्वभाव – मकर · चर – कुम्भ · स्थिर – मीन · द्विस्वभाव – मेष · चर – वृषभ · स्थिर – मिथुन · द्विस्वभाव – कर्क · चर – सिंह · स्थिर – कन्या · द्विस्वभाव – तुला · चर – वृश्चिक · स्थिर –
स्थिर लग्नटिकने वाले कार्यों के लिए: गृह-प्रवेश, देव-स्थापना, लंबी पूजा।चर लग्नचलने वाले कार्यों के लिए: यात्रा, ऐसा आरंभ जो आगे बढ़ता रहे।द्विस्वभाव लग्नदोनों प्रकार के कार्यों के लिए, टिकने वाले भी और चलने वाले भी।

मास

मास (पूर्णिमान्त)कार्तिक
संवतविक्रम 2083 · शक 1948
वारमंगलवार
सूर्य राशिवृश्चिक

पूजा विधि

1
कार्तिक स्नान

प्रातः, संभव हो तो गंगा में, स्नान करें।

2
शिव पूजन

बिल्व, जल और दीपों से त्रिपुरारि शिव का पूजन करें।

3
संध्या में दीप-दान

सायं संध्या में, पूर्णिमा रहते, मंदिर, घाट और घर में दीप जलाएँ और सभी जीवों के कल्याण के लिए त्रिपुरोत्सव का श्लोक पढ़ें।

4
नदी में दीप-दान

गंगा या किसी नदी में दीप प्रवाहित करें।

5
गंगा आरती

संध्या की गंगा आरती में सम्मिलित हों या उसके दर्शन करें।

उत्सव के पकवान

खीरमलइयो (मौसम में)

इतिहास

असुर भाइयों के तीन उड़ते नगर, जो मिलकर त्रिपुर कहलाते थे, केवल एक बाण से उसी क्षण नष्ट हो सकते थे जब वे एक रेखा में आएँ। शिव ने कार्तिक पूर्णिमा को वह बाण छोड़ा और त्रिपुरारि कहलाए। निर्णयसिंधु, भार्गवार्चन-दीपिका को उद्धृत करते हुए, इस पूर्णिमा की संध्या में त्रिपुरोत्सव का विधान करता है, जिसमें दीप इसलिए दिए जाते हैं कि उन्हें देखने वाला हर जीव, कीट हो या पक्षी, जल में हो या थल पर, जन्म-बंधन से मुक्त हो। काशी में यही विधि देव दीपावली बनी, घाटों का दीपोत्सव। इसका आज का विशाल रूप बीसवीं सदी के उत्तरार्ध का पुनर्जागरण है; यह अंश परंपरा का है।

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प्रश्न

Puri में देव दीपावली 2026 कब है?

Puri में देव दीपावली मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को है; त्रिपुरोत्सव दीपदान 5:07 PM से 6:23 PM तक (भारतीय मानक समय, UTC+5:30)।

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मुहूर्त पर स्मरण, आरती के साथ गायन, कथा का पाठ।

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