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काली चौदस

पूजा मुहूर्त – भारतीय मानक समय (UTC+5:30)

Kochi में काली चौदस शनिवार, 7 नवंबर 2026 को है; पूजा मुहूर्त 6:01 PM से 8:27 PM तक (भारतीय मानक समय, UTC+5:30)।

शनि, 7 नव॰, Kochi के मुहूर्त

करें2 मुहूर्त
1 –
पूजा मुहूर्त
परंपरा
2 –
पूजा मुहूर्त
परंपरा
शनिवार, 7 नवंबर 2026भारतीय मानक समय (UTC+5:30)
आश्विन (अमान्त) · कृष्ण पक्ष
13
त्रयोदशी10:48 AM तक, फिर चतुर्दशी
नक्षत्रचित्रारवि 5:53 AM तक, फिर स्वाति
योगप्रीतिरवि 3:28 AM तक, फिर आयुष्मान
करणवणिज10:48 AM तक, फिर विष्टि
सूर्योदय
सूर्यास्त
चंद्रोदय
चंद्रास्त

मुहूर्त

शुभ

ब्रह्म मुहूर्त – अभिजीत मुहूर्त – विजय मुहूर्त – अपराह्न काल – प्रदोष काल – निशीथ काल –

अशुभ

राहु काल – यमगंड – गुलिक काल –
आज के देवताशास्त्र
वारशनिपूरे दिनऔर: यम
परंपरा सेहनुमानपूरे दिन
तिथिकाम6:16 – 10:48 AM10:48 AM से: शिव
नक्षत्रइन्द्र6:16 AM – रवि 5:53 AM5:53 AM से: वायुऔर: त्वष्टा
आज के नियमशास्त्र

न खाएँ

बैंगन – उड़द – तिल का तेल – लाल शाक –

प्रशस्त

सरसों का तेल –

निषेध उतनी देर रहता है जितनी देर उसकी तिथि चलती है।

चौघड़ियापरंपरा (गुजरात–राजस्थान)

दिन

काल · काल वेला (चौघड़िया) – शुभ – रोग – उद्वेग – चर – लाभ · वार वेला – अमृत – काल · काल वेला (चौघड़िया) –

रात

लाभ · कालरात्रि – उद्वेग – शुभ – अमृत – चर – रोग – काल – लाभ · कालरात्रि –
लग्नशास्त्र · ज्योतिष

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

तुला · चर – वृश्चिक · स्थिर – धनु · द्विस्वभाव – मकर · चर – कुम्भ · स्थिर – मीन · द्विस्वभाव – मेष · चर – वृषभ · स्थिर – मिथुन · द्विस्वभाव – कर्क · चर – सिंह · स्थिर – कन्या · द्विस्वभाव – तुला · चर –
स्थिर लग्नटिकने वाले कार्यों के लिए: गृह-प्रवेश, देव-स्थापना, लंबी पूजा।चर लग्नचलने वाले कार्यों के लिए: यात्रा, ऐसा आरंभ जो आगे बढ़ता रहे।द्विस्वभाव लग्नदोनों प्रकार के कार्यों के लिए, टिकने वाले भी और चलने वाले भी।

मास

मास (पूर्णिमान्त)कार्तिक
संवतविक्रम 2083 · शक 1948
वारशनिवार
सूर्य राशितुला

पूजा विधि

1
देहरी पर दीपक

संध्या को मुख्य द्वार पर दक्षिण की ओर तिल के तेल का दीपक जलाएँ और पूरी शाम घर को प्रकाशित रखें।

2
हनुमान पूजन

सिंदूर, तेल, पुष्प और नारियल से हनुमान जी का पूजन करें और रक्षा के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें।

3
रात्रि में महाकाली

देर रात, चतुर्दशी रहते, लाल पुष्प, कुमकुम और घी के दीपक से महाकाली का पूजन करें और उनके मंत्र का जप करें।

4
ककड़ो

अंधेरा होने पर कई परिवार थोड़ा भोजन — प्रायः वड़ा या चावल — दीपक के साथ ले जाकर परिवार पर से उतारते हैं और बिना पीछे देखे चौराहे पर रख आते हैं।

5
काजल और विश्राम

दीपक की कालिख से काजल बनाकर रक्षा के लिए बच्चों की आँखों में लगाएँ। रात शांत रखें; परंपरा से कलह और कटु वचन से बचा जाता है।

उत्सव के पकवान

वड़ा (ककड़ो के लिए)सुखड़ी

इतिहास

काली चौदस दीपावली से पहले कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात का गुजराती नाम और पर्व है; शेष भारत यही तिथि नरक चतुर्दशी के रूप में मनाता है। जहाँ प्रातःकाल नरक के भय से मुक्त करने वाले स्नान का है, वहीं यहाँ रात्रि भय का नाश करने वाली महाकाली और रक्षक हनुमान जी की है। ककड़ो और देहरी का दीपक घरेलू परंपरा से आए हैं। इस नाम से रात्रि-पूजन का कोई प्राथमिक शास्त्रीय स्रोत अभी तक नहीं मिला है; यह जीवित परंपरा से चला आया है।

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प्रश्न

Kochi में काली चौदस 2026 कब है?

Kochi में काली चौदस शनिवार, 7 नवंबर 2026 को है; पूजा मुहूर्त 6:01 PM से 8:27 PM तक (भारतीय मानक समय, UTC+5:30)।

यह दिन, पूरा — Vandan में

मुहूर्त पर स्मरण, आरती के साथ गायन, कथा का पाठ।

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