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वैकुण्ठ चतुर्दशी

पूजा मुहूर्त – भारतीय मानक समय (UTC+5:30)

Raipur में वैकुण्ठ चतुर्दशी सोमवार, 23 नवंबर 2026 को है; पूजा मुहूर्त 4:43 AM से 6:18 AM तक (भारतीय मानक समय, UTC+5:30)।

सोम, 23 नव॰, Raipur के मुहूर्त

करें4 मुहूर्त
1 –
पूजा मुहूर्त
शास्त्र
2 –
संकल्प
परंपरा
3 –
पूजा मुहूर्त (गौण)
शास्त्र
4 –
पूजा मुहूर्त
शास्त्र

आरती, मंत्र और कथा

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सोमवार, 23 नवंबर 2026भारतीय मानक समय (UTC+5:30)
कार्तिक (अमान्त) · शुक्ल पक्ष
14
चतुर्दशी11:42 PM तक, फिर पूर्णिमा
नक्षत्रभरणीमंगल 2:02 AM तक, फिर कृत्तिका
योगवरीयान7:59 PM तक, फिर परिघ
करणगर1:14 PM तक, फिर वणिज
सूर्योदय
सूर्यास्त
चंद्रोदय
चंद्रास्त

मुहूर्त

शुभ

ब्रह्म मुहूर्त – अभिजीत मुहूर्त – विजय मुहूर्त – अपराह्न काल – प्रदोष काल – निशीथ काल –

अशुभ

राहु काल – यमगंड – गुलिक काल –
आज के देवताशास्त्र
वारचन्द्रपूरे दिनऔर: शक्ति (उमा)
तिथिशिव6:18 AM – 11:42 PM11:42 PM से: चन्द्रऔर: काली
नक्षत्रयम6:18 AM – मंगल 2:02 AM2:02 AM से: अग्नि
आज के नियमशास्त्र

न खाएँ

उड़द – तिल का तेल – लाल शाक –

प्रशस्त

सरसों का तेल –

निषेध उतनी देर रहता है जितनी देर उसकी तिथि चलती है।

चौघड़ियापरंपरा (गुजरात–राजस्थान)

दिन

अमृत – काल · काल वेला (चौघड़िया) – शुभ – रोग – उद्वेग – चर – लाभ · वार वेला – अमृत –

रात

चर – रोग – काल – लाभ · कालरात्रि – उद्वेग – शुभ – अमृत – चर –
लग्नशास्त्र · ज्योतिष

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वृश्चिक · स्थिर – धनु · द्विस्वभाव – मकर · चर – कुम्भ · स्थिर – मीन · द्विस्वभाव – मेष · चर – वृषभ · स्थिर – मिथुन · द्विस्वभाव – कर्क · चर – सिंह · स्थिर – कन्या · द्विस्वभाव – तुला · चर – वृश्चिक · स्थिर –
स्थिर लग्नटिकने वाले कार्यों के लिए: गृह-प्रवेश, देव-स्थापना, लंबी पूजा।चर लग्नचलने वाले कार्यों के लिए: यात्रा, ऐसा आरंभ जो आगे बढ़ता रहे।द्विस्वभाव लग्नदोनों प्रकार के कार्यों के लिए, टिकने वाले भी और चलने वाले भी।

मास

मास (पूर्णिमान्त)कार्तिक
संवतविक्रम 2083 · शक 1948
वारसोमवार
सूर्य राशिवृश्चिक

पूजा विधि

1
दिन का उपवास

चतुर्दशी के दिन उपवास रखें।

2
रात्रि में विष्णु पूजन

रात्रि में, संभव हो तो चतुर्दशी रहते निशीथ काल में, कमल, तुलसी और षोडशोपचार से विष्णु का पूजन करें।

3
पत्रों का आदान-प्रदान

विष्णु को बिल्व-पत्र और शिव को तुलसी अर्पित करें।

4
जागरण

कीर्तन और भगवान की लीलाओं के पाठ के साथ रात्रि जागरण करें। जो कार्तिक व्रत पूरा कर रहे हैं, वे आज उसका उद्यापन करें।

5
अरुणोदय में शिव पूजन

अरुणोदय में, चतुर्दशी रहते, स्नान करें — काशी में मणिकर्णिका पर — और शिव का पूजन करें। इस विधि का उपवास पिछले दिन होता है।

6
पारण

प्रातः व्रत खोलें।

उत्सव के पकवान

फलाहार — फल, दूध, मखाना

इतिहास

परंपरा कहती है कि इस दिन विष्णु काशी में एक हज़ार कमलों से शिव का पूजन करने आए। एक कमल कम पड़ा तो उन्होंने उसकी जगह अपना एक कमल-नेत्र अर्पित कर दिया। प्रसन्न शिव ने उन्हें सुदर्शन चक्र दिया, और यह दिन वैकुण्ठ का, यानी विष्णु के अपने धाम का, दिन बना। कहा जाता है कि इस दिन पूजन करने वालों के लिए वह धाम खुलता है। निर्णयसिंधु सनत्कुमार-संहिता उद्धृत करता है: इसी चतुर्दशी को अरुणोदय में स्वयं विश्वेश्वर ने मणिकर्णिका में स्नान कर पूजन किया। कमल की कथा शिव पुराण और कार्तिक-माहात्म्य में मिलती है; वे अध्याय अभी पृष्ठ पर नहीं पढ़े गए हैं।

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प्रश्न

Raipur में वैकुण्ठ चतुर्दशी 2026 कब है?

Raipur में वैकुण्ठ चतुर्दशी सोमवार, 23 नवंबर 2026 को है; पूजा मुहूर्त 4:43 AM से 6:18 AM तक (भारतीय मानक समय, UTC+5:30)।

यह दिन, पूरा — Vandan में

मुहूर्त पर स्मरण, आरती के साथ गायन, कथा का पाठ।

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