
Bhavnagar में सन्ध्या अर्घ्य रविवार, 15 नवंबर 2026 को है; संध्या अर्घ्य (अस्ताचल सूर्य) 3:46 PM से 5:58 PM तक (भारतीय मानक समय, UTC+5:30)।
रवि, 15 नव॰, Bhavnagar के मुहूर्त
फिर: दिन 4, सोम, 16 नव॰
संध्या अर्घ्य (अस्ताचल सूर्य) विधिप्रत्येक चित्र Vandan में वही पृष्ठ खोलता है
शुभ
अशुभ
सूर्यपूरे दिनऔर: शिवन खाएँ
निषेध उतनी देर रहता है जितनी देर उसकी तिथि चलती है।
दिन
रात
सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
• घर पर पूरी शुद्धता से गेहूँ के आटे और गुड़ का ठेकुआ और चावल के लड्डू बनाएँ। • सूप और दउरा में ठेकुआ, लड्डू, मौसमी फल, गन्ना, नारियल, दीया और सिंदूर रखें (परंपरा)
• अपराह्न में परिवार टोकरियाँ लेकर नदी, तालाब या पोखर पर जाता है, और स्त्रियाँ रास्ते में और घाट पर छठ के गीत गाती हैं (परंपरा)
• इस पृष्ठ पर दिखाई गई संध्या की अवधि में, जो सूर्यास्त पर समाप्त होती है, व्रती पश्चिम की ओर मुख करके जल में खड़े होकर सूप ऊपर उठाते हैं। • परिवार के लोग सूप पर जल या दूध डालकर अर्घ्य देते हैं (परंपरा)
• जिस परिवार की मनौती पूरी हुई हो, वह आज रात आँगन में कोसी भरता है — मिट्टी के दीयों और घड़े पर गन्नों का छत्र (परंपरा)
• प्रसाद घर ले आएँ; निर्जला व्रत रात भर, भोर के अर्घ्य तक चलता है (परंपरा)
ठेकुआचावल के लड्डू (कसार)
फल का प्रसाद (गन्ना, केला, नारियल, डाभ नींबू)Bhavnagar में सन्ध्या अर्घ्य रविवार, 15 नवंबर 2026 को है; संध्या अर्घ्य (अस्ताचल सूर्य) 3:46 PM से 5:58 PM तक (भारतीय मानक समय, UTC+5:30)।
अर्पण से पहले प्रसाद न चखें (परंपरा) व्रत के दिनों में घर में प्याज़, लहसुन या कुछ भी अशुद्ध न पकाएँ (परंपरा) डॉक्टर की सलाह के विरुद्ध निर्जल व्रत न रखें (परंपरा)
मुहूर्त पर स्मरण, आरती के साथ गायन, कथा का पाठ।